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क्या सत्य किसी एक धर्म की संपत्ति है?

दुनिया में सैकड़ों धर्म है।

हजारों गुरु हुए है।

हर किसी ने एक “मार्ग” बताया है।

लेकिन क्या हमने कभी रुककर यह पूछा है –

की हम जो मानते है, उसे समझते भी है?

इतने विचारों के बीच सत्य कहाँ है?

किसी ने कहा – ईश्वर बाहर है।

किसी ने कहा – भीतर।

किसी ने कहा – बस विश्वास रखो।

पर क्या सत्य किसी वाक्य में कैद हो सकता है?

यहाँ धर्मों को पढ़ा जाएगा,

गुरुओ को समझा जाएगा,

और जहां जरुरी होगा – वहाँ प्रश्न भी पूछे जाएंगे।

मानना आसान है। समझना कठिन।

धर्म केवल परंपरा नहीं,

वे मनुष्य की चेतना के प्रयास हैं।

यह मंच उन प्रयासों को खोलकर देखने की जगह है-

उनकी जड़ें, उनके विचार, उनकी सीमाएँ।

यदि आप केवल मानने नहीं,

समझने आए हैं-

तो स्वागत है।

– एक अज्ञानी आचार्य

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